Saturday, February 9, 2013

[IAC#RG] लोकतंत्र के लिए एक मुकम्मल दिन: अरुंधति राय

लेकिन अब इस बात से कि अफजल गुरु को फांसी दी जा चुकी है, मैं उम्मीद करती हूं कि हमारी सामूहिक चेतना संतुष्ट हो गई होगी. या हमारा खून का कटोरा अभी आधा ही भरा है?

लोकतंत्र के लिए एक मुकम्मल दिन: अरुंधति राय

No comments:

Post a Comment